BHILWARA

समरसता के रंग में रंगा भीलवाड़ा, उमड़ा आस्था का सैलाब’एक जाजम, एक पंगत’ ने मिटाई ऊंच-नीच की दीवारें


हजारों टिफिन से बना समरसता का महाप्रसाद
भीलवाड़ा-मूलचन्द पेसवानी
भीलवाड़ा शहर इन दिनों भक्ति, समरसता और सामाजिक एकता के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है। परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान एवं श्री सांवरिया सेठ मंदिर ट्रस्ट, नौगांवा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ’भागवत समरसता महोत्सव’ के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पंडाल में ऐसा लगा मानो पूरा समाज एक सूत्र में बंध गया हो।


जोधपुर के विख्यात गोवत्स संत श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने कथा के दौरान कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग को जीवंत करते हुए राष्ट्र, समाज और संगठन की शक्ति पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कोरोना महामारी के कठिन दौर को याद करते हुए भारतीय परिवार व्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया। महाराज श्री ने कहा कि जहां विदेशों में लोग अकेलेपन के कारण टूट गए, वहीं भारत में परिवार और समाज की एकजुटता ने लोगों को संभाले रखा। संतों ने सत्संग से आध्यात्मिक बल दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जरूरतमंदों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाकर समाज की सेवा की।
कथा के दौरान गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए महाराज श्री ने समरसता का अनूठा संदेश दिया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अकेले ही पर्वत उठा सकते थे, लेकिन उन्होंने ग्वालों को लाठियां लगाने को कहा। यह दृश्य हमें सिखाता है कि जब पूरा समाज एकजुट होकर खड़ा होता है, तो बड़ी से बड़ी विपदा भी छोटी हो जाती है।
महाराज श्री ने वर्तमान समय में हर नागरिक की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि ईंधन और बिजली की बचत भी राष्ट्र सेवा का ही एक रूप है। उन्होंने संत और संघ को एक ही उद्देश्य की दो धाराएं बताते हुए समाज को संगठित रहने का आह्वान किया।
महोत्सव का सबसे आकर्षक और भावुक क्षण रहा ’समरसता महाभोज’, जहां ’एक जाजम, एक पंगत’ का दृश्य देखने को मिला। हजारों लोग एक साथ जमीन पर बैठकर भोजन करते नजर आए। इस महाभोज में जाति-पाति और ऊंच-नीच की सभी सीमाएं टूटती नजर आईं। खास बात यह रही कि हजारों माताएं अपने घरों से लापसी और पूरी बनाकर लाई, जो मिलकर एक विशाल महाप्रसाद में परिवर्तित हो गई।
महाराज श्री स्वयं भी सभी समाजों के लोगों के साथ बैठकर सादगी से प्रसाद ग्रहण करते नजर आए, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा और यह दृश्य सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया। जल एवं संसाधन मंत्री सुरेश रावत भी इस समरसता भोज में शामिल होकर आमजन के साथ बैठे।
कार्यक्रम के दौरान संत महामंडलेश्वर हंसराम उदासीन, महंत लक्ष्मण दास त्यागी, महंत श्यामसुंदर दास सहित कई संतों और गणमान्य नागरिकों ने महाराज श्री का अभिनंदन किया। वहीं शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा सहित अनेक समाजसेवी और संगठन पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि गुरुवार सुबह 9 बजे सुदामा चरित्र की कथा के साथ महोत्सव का भव्य समापन होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रामधाम से निःशुल्क बस सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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