BHILWARA

श्रीमद्भागवत कथा  भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलाने वाली दिव्य प्रेरणा – कृपा राम जी महाराज

नंदोत्सव में भजनों पर झूमे श्रद्धालु

भीलवाड़ा 6 जून।
पूरणमल-सम्पत देवी रांदड़ परिवार के तत्वावधान में महेश वाटिका में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पंचम दिवस कथा व्यास श्रद्धेय कृपारामजी महाराज (जोधपुर) ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं का संगीतमय एवं भावपूर्ण वर्णन किया। कथा आरंभ से पूर्व भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों से सम्पूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।


कृपारामजी महाराज ने नंदोत्सव प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण से सम्पूर्ण ब्रजभूमि आनंद और उल्लास से भर उठी थी। नंद बाबा के घर जन्मे कान्हा के आगमन पर गोकुल में उत्सव का ऐसा वातावरण था कि हर ओर बधाइयां, मंगल गीत और उत्साह की लहर दिखाई देती थी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” भजन पर भक्ति भाव से सहभागिता की।
कथा के दौरान महाराज ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार बालकृष्ण अपनी चंचल एवं मनमोहक अदाओं से समस्त ब्रजवासियों का हृदय जीत लेते थे। उन्होंने माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान का यह स्वरूप केवल बाल सुलभ चेष्टाएं नहीं, बल्कि भक्तों के हृदय रूपी माखन को चुराने का दिव्य संदेश है। इस प्रसंग पर गाए गए भजन “मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो” ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
महाराज ने पूतना वध, शकटासुर उद्धार एवं अन्य बाल लीलाओं का भी विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि भगवान भक्तों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलाने वाली दिव्य प्रेरणा है।
संगीतमय भजनों “यशोदा ने माखन खिलायो रे”, “राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी” एवं “गोविन्द बोलो हरि गोपाल बोलो” पर श्रद्धालु झूम उठे। कथा के दौरान महिलाओं, युवाओं एवं वरिष्ठ श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही और सभी ने भक्ति रस का आनंद लिया।
आयोजन समिति के जगदीश सोनी, पियूष सोनी एवं खुशाल रांदड़ ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव सोमवार 8 जून तक प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक महेश वाटिका में आयोजित होगा। उन्होंने अधिकाधिक धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की।

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