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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मानवता की अनूठी मिसाल ; एक ही परिवार की तीन महिलाओं ने दान किए बाल ; कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए बढ़ाया मदद का हाथ ; श्रेया कुमावत की प्रेरणा से उठाया सेवा का कदम


शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शाहपुरा में मानवता, संवेदनशीलता और समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। यहां एक ही परिवार की तीन महिलाओं ने कैंसर पीड़ित बच्चों की मदद के लिए अपने बाल दान कर समाज के सामने सेवा और संवेदना का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।
शाहपुरा की मेना धाकड़ (सरपंच), उनकी सगी बहन आशा धाकड़ तथा उनकी भाभी सरोज धाकड़ ने यह सराहनीय कदम उठाया। तीनों महिलाओं ने अपने बाल कैंसर से जूझ रहे बच्चों के लिए दान किए, जिससे उनके लिए विग तैयार की जा सके और वे सामान्य जीवन की ओर लौटने का आत्मविश्वास महसूस कर सकें।
इन महिलाओं ने यह प्रेरणादायक निर्णय शाहपुरा की नन्ही बालिका श्रेया कुमावत द्वारा किए गए बाल दान की खबर पढ़ने के बाद लिया। श्रेया की इस पहल से प्रभावित होकर उन्होंने भी समाज सेवा में अपना योगदान देने का संकल्प लिया। छोटी सी बच्ची द्वारा दिखाए गए इस साहस और संवेदनशीलता ने उन्हें गहराई से प्रेरित किया।


मेना धाकड़, जो ज्ञानचंद धाकड़ (पूर्व पालिका उपाध्यक्ष) की पुत्रवधू हैं और वर्तमान में डाबला कचरा ग्राम पंचायत की सरपंच के रूप में सेवाएं दे रही हैं, ने बताया कि जब छोटे-छोटे बच्चे भी समाज सेवा के कार्यों में आगे आकर मिसाल पेश कर रहे हैं, तो हम बड़ों का भी कर्तव्य बनता है कि समाज के लिए कुछ सकारात्मक और प्रेरणादायक कार्य करें।
उन्होंने कहा कि यदि उनके बाल किसी कैंसर पीड़ित बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ला सकें और उसे आत्मविश्वास दे सकें, तो इससे बड़ी खुशी उनके लिए कोई नहीं हो सकती। उन्होंने समाज के अन्य लोगों से भी अपील की कि वे इस तरह के मानवीय कार्यों में आगे आएं और जरूरतमंदों की मदद करें।


इन तीनों महिलाओं ने अपने बाल श्रेया कुमावत के माध्यम से “इन्वेटिव हेल्पिंग हेड सोसायटी, जयपुर” को दान किए। यह संस्था कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए विग तैयार कर उन्हें आत्मबल प्रदान करने का सराहनीय कार्य कर रही है। संस्था की संस्थापक एवं डायरेक्टर हिमांशी गहलोत इस सेवा कार्य के माध्यम से कई जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रही हैं।
इस पहल से यह संदेश मिला कि समाज में छोटी-सी प्रेरणा भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है। नन्ही श्रेया की प्रेरणा से शुरू हुई यह सेवा भावना अब कई लोगों को मानवता और परोपकार के कार्यों के लिए प्रेरित कर रही है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शाहपुरा की इन महिलाओं की यह पहल न केवल समाज सेवा का उदाहरण बनी, बल्कि यह भी साबित कर गई कि महिलाओं की संवेदनशीलता और सेवा भावना समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

KAPIL SHYAM VIJAY

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