प्रशासनिक समझाइश रंग लाई: कुराछों का खेड़ा के ग्रामीणों ने वापस लिया मतदान बहिष्कार का फैसला

आसींद । उपखंड क्षेत्र के कुराछों का खेड़ा गांव में पंचायत बदलने की मांग को लेकर उठ रही मतदान बहिष्कार की आवाज अब शांत हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के त्वरित हस्तक्षेप और सफल वार्ता के बाद ग्रामीणों ने अपना विरोध वापस ले लिया है और आगामी चुनाव में मताधिकार का प्रयोग करने के लिए सहमत हो गए हैं।
SDM विकास मोहन भाटी की ग्रामीणों के साथ वार्ता रही सफल
दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद उपखंड निर्वाचन अधिकारी एवं उपखंड अधिकारी (SDM) आसींद विकास मोहन भाटी की अगवाई में प्रशासनिक व निर्वाचन टीम शनिवार को कुराछों का खेड़ा गांव पहुंची। अधिकारियों ने गांव के चौपाल पर बैठकर ग्रामीणों के साथ विस्तृत चर्चा की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
वार्ता के बाद उपखंड अधिकारी विकास मोहन भाटी ने बताया कि ग्रामीणों के साथ हुई बातचीत पूरी तरह सफल रही है। प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने संतोष जताया है और अब गांव वाले मतदान का बहिष्कार नहीं करेंगे।
क्या था पूरा मामला?
दूरी बनी थी असंतोष का कारण: ग्रामीणों का कहना था कि कुराछों का खेड़ा पूर्व में महज 1 किलोमीटर दूर रूपपुरा ग्राम पंचायत में शामिल था। लेकिन पुनर्गठन के दौरान इसे लगभग 9 किलोमीटर दूर बागमाली ग्राम पंचायत से जोड़ दिया गया।
किसानों की परेशानी: गांव कृषि प्रधान होने के कारण किसानों व ग्रामीणों को छोटे-छोटे पंचायत कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी।
600 मतदाताओं का था ऐलान: समस्या का समाधान न होने पर करीब 200 घरों के 600 मतदाताओं ने सर्वसम्मति से मतदान बहिष्कार का ऐलान करते हुए गांव में बैनर लगा दिए थे।
लोकतंत्र की जीत: मतदान करेंगे ग्रामीण
प्रशासनिक टीम द्वारा ग्रामीणों को आश्वस्त किए जाने के बाद गांव का माहौल सामान्य हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर भरोसा जताते हुए लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर भाग लेने और शांतिपूर्ण ढंग से मतदान करने का निर्णय लिया है।



