बिजोलिया में खनन माफिया पर भारी कौन? खटारा वाहन, दो अधिकारी और बेखौफ अवैध बजरी परिवहन

बिजोलिया।
अवैध खनन और अवैध बजरी परिवहन पर लगाम लगाना अगर सिर्फ इच्छाशक्ति का मामला है, तो सवाल यह है कि बिजोलिया में वह इच्छाशक्ति आखिर दिखाई क्यों नहीं देती? ऊपरमाल पत्थर खान व्यवसायी संघ (सेवा संस्थान) के मंत्री एवं प्रवक्ता रामप्रसाद विजयवर्गीय ने बिजोलिया ख़ान विभाग की बदहाल स्थिति को उजागर करते हुए यह तीखा सवाल उठाया है।

विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश के राजस्व में तीसरे स्थान पर रहने वाला ख़ान विभाग आज खुद संसाधनों के लिए मोहताज है। बिजोलिया ख़ान विभाग में वर्षों पुराना एक खटारा वाहन है, जो लगभग तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुका है। हालात यह हैं कि अवैध बजरी परिवहन में लगे तेज़ रफ्तार वाहनों का पीछा करते समय यह वाहन रास्ते में ही हांफ जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अवैध परिवहन पकड़ा कैसे जाए?
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उन्होंने बताया कि बिजोलिया सहित प्रदेश के अधिकांश खनि अभियंता कार्यालयों में मात्र दो तकनीकी अधिकारी कार्यरत हैं। इन्हीं दो अधिकारियों को कार्यालयीन कामकाज, फील्ड में सीमांकन, नए खनिज क्षेत्रों का चयन, शिकायतों का निस्तारण, ऑनलाइन पोर्टल का कार्य, बकाया वसूली, अवैध खनन स्थलों की जांच, वाहन जब्ती और थानों में एफआईआर दर्ज कराने जैसी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। एक ही वाहन को जब्त कर थाने में एफआईआर दर्ज कराने में पूरा दिन लग जाता है।
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विजयवर्गीय ने हाल ही में ब्यावर में विभागीय अधिकारियों के साथ हुई मारपीट और वाहन में तोड़फोड़ की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यदि समय रहते सख़्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं बिजोलिया जैसे क्षेत्रों में भी दोहराई जा सकती हैं। तकनीकी अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि बिजोलिया सहित अवैध बजरी दोहन और परिवहन के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बटालियन की स्थायी तैनाती की जाए। यदि इसके बावजूद अवैध गतिविधियां होती हैं, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
विजयवर्गीय ने कहा कि विभाग में ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों की हौसला-अफजाई जरूरी है। पुलिस विभाग की तर्ज पर ख़ान विभाग के तकनीकी अधिकारियों को भी गैलेंट्री अवार्ड दिए जाने चाहिए, ताकि वे दबाव और भय से मुक्त होकर सरकारी दायित्वों का निर्वहन कर सकें।



