बंदियों की समस्याएं सुनीं, भेदभाव नहीं करने के दिए निर्देश
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
माननीय सुप्रीम कोर्ट के ‘सुकन्या शांता बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए निर्णय की पालना में उप कारागृह शाहपुरा का बोर्ड ऑफ विजिटर्स द्वारा त्रैमासिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जेल में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था तथा विधिक सहायता सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
निरीक्षण अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सानिया हाशमी की अगुवाई में किया गया। बोर्ड ऑफ विजिटर्स में उपखंड अधिकारी बनवारी लाल सिनसिनवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजुम कायल, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अनुप सिंह मीणा, नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी पुरुषोत्तम पंवार, अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा, चिकित्सक डॉ. रविन्द्र धनोपिया तथा अपर लोक अभियोजक हितेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
भेदभाव को लेकर बंदियों से की पूछताछ-
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बंदियों से जाति, धर्म एवं दिव्यांगता के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव के संबंध में जानकारी ली। बंदियों से सीधे संवाद कर यह जानने का प्रयास किया गया कि जेल में उन्हें किसी तरह के भेदभाव अथवा असमान व्यवहार का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बंदियों के साथ जाति, धर्म, दिव्यांगता अथवा किसी अन्य आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। इस संबंध में उप कारापाल श्री किशन लाल मीणा को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
रसोई और पेयजल व्यवस्था भी जांची–
बोर्ड ने उप कारागृह की रसोई व्यवस्था का निरीक्षण कर बंदियों को उपलब्ध करवाए जा रहे भोजन की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, जेल परिसर की स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया। सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए जेल में सुरक्षा मानकों की स्थिति की जानकारी ली गई। चिकित्सा सुविधा तथा बंदियों को आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में भी अधिकारियों ने जानकारी प्राप्त की।
विधिक सहायता की जानकारी दी-
निरीक्षण के दौरान विधिक सहायता एवं विधिक सेवा क्लिनिक की व्यवस्थाओं की भी जांच की गई। अधिकारियों ने बंदियों से बातचीत कर उनकी कानूनी समस्याओं एवं लंबित मामलों के संबंध में जानकारी ली। बंदियों को निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त करने सहित उनके विधिक अधिकारों के बारे में भी अवगत कराया गया। बंदियों से उनकी व्यक्तिगत शिकायतों और जेल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर समस्याओं के बारे में भी संवाद किया गया। अधिकारियों ने संबंधित व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने तथा बंदियों की शिकायतों का नियमानुसार निराकरण करने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान जेल अधिकारी-कर्मचारी एवं अन्य संबंधित कर्मचारी भी उपस्थित रहे। बोर्ड ऑफ विजिटर्स के इस त्रैमासिक निरीक्षण को जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और बंदियों के अधिकारों एवं सुविधाओं की निगरानी की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
