सामान्य सीट पर दलित सरपंच की जीत का सियासी संदेश, विरोधी भी बने स्वागतकर्ता!

386 वोटों से राकेश खटीक ने दर्ज की जीत, चुनाव में आमने-सामने रहे प्रत्याशियों ने एकजुट होकर करवाया पदभार ग्रहण
शक्करगढ़। चुनावी मैदान में भले ही एक-दूसरे को चुनौती दी हो, लेकिन परिणाम आते ही तस्वीर बदल गई। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को पीछे छोड़कर सभी प्रत्याशी गांव के विकास और भाईचारे के लिए एक मंच पर नजर आए। ग्राम पंचायत बाकरा में सामान्य सीट पर दलित समाज से आने वाले राकेश कुमार खटीक की जीत ने क्षेत्र में नई चर्चा छेड़ दी है। राकेश खटीक ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को 386 वोटों से शिकस्त देकर सरपंच पद पर कब्जा जमाया। शुक्रवार को उन्होंने विधिवत पदभार ग्रहण किया।
इस समारोह की सबसे खास तस्वीर तब देखने को मिली, जब चुनाव में राकेश खटीक के सामने ताल ठोकने वाले विपक्षी प्रत्याशी खुद उनके स्वागत के लिए आगे आए। सत्यनारायण शर्मा, सत्यनारायण सेन, दीपक पाराशर, शराफत मोहम्मद, रतन प्रजापत सहित अन्य प्रत्याशियों ने एकजुट होकर नवनिर्वाचित सरपंच का स्वागत किया और उन्हें पदभार ग्रहण करवाया। चुनावी हार-जीत को भुलाकर विपक्ष का इस तरह साथ आना ग्रामीण राजनीति में चर्चा का विषय बन गया।
ग्राम विकास अधिकारी हंसराज बैरवा ने आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाकर राकेश कुमार खटीक को विधिवत कार्यभार ग्रहण करवाया। वहीं पूर्व सरपंच निशा देवी मीणा ने पंचायत की चाबी सौंपकर नए सरपंच का स्वागत किया। इस दौरान किशनगढ़ सरपंच शैतान सिंह मीना कैलाश तेली ,घीसू माली ,अशोक मीणा पुखराज खटीक , अनिल सालवी जेपी सालवी सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे
जीत के बाद बदली तस्वीर, अब विकास की उम्मीदें
बाकरा पंचायत में सामान्य सीट पर दलित समाज के प्रत्याशी की 386 वोटों से जीत को ग्रामीणों ने जनसमर्थन की बड़ी मिसाल के रूप में देखा। वहीं चुनाव में प्रतिद्वंद्वी रहे प्रत्याशियों का पदभार ग्रहण समारोह में एकजुट होना भी खास रहा। अब ग्रामीणों को नवनिर्वाचित सरपंच से गांव की मूलभूत समस्याओं के समाधान, विकास कार्यों में तेजी और पंचायत में पारदर्शी व्यवस्था की उम्मीद है। चुनाव का अध्याय समाप्त हो चुका है, अब असली परीक्षा गांव के विकास के मोर्चे पर होगी।



